Labour Minimum Wages Hike 2026 Update: भारत में श्रमिकों के अधिकारों और उनकी आर्थिक सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 से “कोड ऑन वेजेस 2019” को पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू कर दिया है, जो पिछले सात दशकों से चले आ रहे न्यूनतम मजदूरी अधिनियम 1948 की जगह लेता है। इस नए कानून के तहत पहली बार देश के हर श्रमिक को — चाहे वह किसी भी क्षेत्र में काम करता हो — न्यूनतम मजदूरी का कानूनी अधिकार मिला है। इससे करोड़ों असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी और नई परिभाषा
नए कानून की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि केंद्र सरकार ने एक “नेशनल फ्लोर वेज” यानी राष्ट्रीय न्यूनतम आधार मजदूरी तय की है, जो वर्तमान में ₹178 प्रतिदिन की सलाहकारी दर पर निर्धारित है। इसका अर्थ यह है कि कोई भी राज्य सरकार इस आधार दर से कम मजदूरी तय नहीं कर सकती। साथ ही, मजदूरी की नई परिभाषा के तहत “50% नियम” लागू किया गया है — जिसके अनुसार किसी भी कर्मचारी का मूल वेतन और महंगाई भत्ता मिलाकर कुल वेतन का कम से कम 50% होना अनिवार्य है। यह नियम नियोक्ताओं द्वारा भत्तों की आड़ में मूल वेतन कम दिखाने की प्रथा पर रोक लगाता है।
किन श्रमिकों को मिलेगा सबसे अधिक लाभ
इस कानून का सबसे बड़ा फायदा असंगठित क्षेत्र के उन करोड़ों मजदूरों को होगा जो अभी तक किसी कानूनी सुरक्षा के दायरे में नहीं थे। पुराने कानून में केवल “अनुसूचित रोजगार” के मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी का अधिकार था, लेकिन नए कोड ऑन वेजेस के तहत निर्माण कार्य, कृषि, फैक्ट्री, सेवा क्षेत्र और यहाँ तक कि गिग व डिजिटल प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी कानूनी सुरक्षा मिलेगी। इसके अलावा, अकुशल, अर्धकुशल, कुशल और अत्यधिक कुशल — चारों श्रेणियों के लिए अलग-अलग मजदूरी दरें तय की गई हैं, जो हर राज्य में उस क्षेत्र की जीवनयापन लागत के अनुसार निर्धारित होती हैं।
राज्यों में मजदूरी की ताज़ा स्थिति
राज्यों की बात करें तो दिल्ली में 1 अप्रैल 2025 से नई मजदूरी दरें लागू हैं, जिसमें अकुशल श्रमिकों को ₹18,456 और कुशल श्रमिकों को ₹22,411 प्रतिमाह मिल रहे हैं। ओडिशा, गोवा, झारखंड और आंध्र प्रदेश ने भी अक्टूबर 2025 से नई VDA (Variable Dearness Allowance) दरें अधिसूचित की हैं। हर राज्य अपनी आर्थिक स्थिति और महंगाई के अनुसार समय-समय पर मजदूरी संशोधित करता है, इसलिए श्रमिकों को अपने राज्य के श्रम विभाग की आधिकारिक अधिसूचनाएँ नियमित रूप से देखनी चाहिए। श्रमिक clc.gov.in या labour.gov.in पर जाकर अपने राज्य की ताज़ा मजदूरी दरें जाँच सकते हैं।
नियोक्ताओं की जवाबदेही और निरीक्षण व्यवस्था
नए कानून में नियोक्ताओं की जवाबदेही को भी कड़ा बनाया गया है। अब “इंस्पेक्टर” की जगह “इंस्पेक्टर-कम-फैसिलिटेटर” की व्यवस्था की गई है, जो कंपनियों को नियमों का पालन करने में मदद भी करेगा और उल्लंघन पर कार्रवाई भी। वेतन भुगतान की अंतिम तारीख हर माह की 7 तारीख तय की गई है और उल्लंघन पर भारी जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, कर्मचारियों को यह अधिकार दिया गया है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए कानूनी रास्ता अपना सकें। यह बदलाव श्रमिक वर्ग के लिए एक मजबूत कानूनी ढाँचा तैयार करता है जो उन्हें शोषण से बचाएगा।
अस्वीकरण: यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी और सरकारी नीतियों के आधार पर लिखा गया है। न्यूनतम मजदूरी की दरें राज्य, उद्योग और कौशल स्तर के अनुसार अलग-अलग होती हैं। सटीक और अद्यतन जानकारी के लिए कृपया labour.gov.in या clc.gov.in पर जाएँ अथवा अपने राज्य के श्रम विभाग से संपर्क करें।









