Fertilizer Distribution: मध्यप्रदेश के रीवा जिले में खेती-किसानी से जुड़ी एक बड़ी और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। जिला प्रशासन ने किसानों के लिए उर्वरक यानी खाद के वितरण की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करने का फैसला किया है। अब 1 अप्रैल 2025 से रीवा जिले में खाद का वितरण पूरी तरह ई-टोकन प्रणाली के जरिए किया जाएगा। कलेक्टर प्रतिभा पाल ने हाल ही में आयोजित एक समीक्षा बैठक में यह निर्देश अधिकारियों को दिए हैं। इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य खाद वितरण में पारदर्शिता लाना और फर्जीवाड़े को रोकना है।
क्या है ई-टोकन प्रणाली?
ई-टोकन प्रणाली एक डिजिटल तरीका है जिसके माध्यम से किसानों को खाद लेने से पहले एक डिजिटल टोकन लेना होगा। इस टोकन के आधार पर ही किसान को सरकारी समितियों या विपणन केंद्रों पर उर्वरक दिया जाएगा। बिना ई-टोकन के किसी भी किसान को खाद नहीं मिलेगी, यह बात कलेक्टर ने बिल्कुल साफ कर दी है। यह व्यवस्था इसलिए लाई गई है ताकि सही किसान को सही मात्रा में खाद मिल सके और बिचौलियों व अपात्र लोगों को इसका फायदा न उठाने का मौका मिले। इस प्रणाली से खाद की कालाबाजारी पर भी काफी हद तक रोक लगाई जा सकती है।
किसानों को दी जाएगी पूरी जानकारी
प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि किसानों को इस नई व्यवस्था के बारे में पहले से पूरी जानकारी दी जाए। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि समितियाँ और विपणन विभाग मिलकर किसानों तक ई-टोकन की प्रक्रिया की जानकारी समय पर पहुँचाएँ। जिन किसानों की फार्मर आईडी अभी तक नहीं बनी है, उनके लिए भी विशेष इंतजाम किए जाने के आदेश दिए गए हैं। ऐसे किसानों को शासन के पास उपलब्ध भूमि रिकॉर्ड के आधार पर खाद उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि कोई भी वास्तविक किसान इस सुविधा से वंचित न रहे।
गेहूं उपार्जन में 100 प्रतिशत सत्यापन पर जोर
इसी बैठक में कलेक्टर ने गेहूं उपार्जन की तैयारियों की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि पंजीकृत किसानों के खेत के रकबे का शत-प्रतिशत सत्यापन किया जाए। केवल वास्तविक किसानों को ही उपार्जन का लाभ मिलना चाहिए और किसी भी फर्जी व्यक्ति को इसका फायदा नहीं उठाने दिया जाएगा। जहाँ कहीं भी रकबे में अचानक बढ़ोतरी देखी जाए, वहाँ एसडीएम को खुद मौके पर जाकर जाँच करने के आदेश दिए गए हैं। इससे यह सुनिश्चित होगा कि गेहूं खरीद में कोई भी अनियमितता न हो।
सीएम हेल्पलाइन की शिकायतों का समय पर निराकरण जरूरी
बैठक में मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायतों की भी गहन समीक्षा हुई। कलेक्टर ने सभी विभागों को यह निर्देश दिया कि कोई भी शिकायत अनदेखी न रहे और सभी लंबित मामलों का समयबद्ध तरीके से समाधान किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को साफ चेतावनी दी कि जो विभाग सी और डी श्रेणी में हैं, वे गंभीरता से काम करें और अपनी रैंकिंग को ए श्रेणी में लेकर आएँ। लापरवाह अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
संकल्प से समाधान और जल-गंगा अभियान
कलेक्टर ने “संकल्प से समाधान” अभियान के तहत ब्लॉक स्तर पर लगाए जाने वाले शिविरों में आवेदनों का त्वरित निराकरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया। उनका मानना है कि जिला स्तर पर अनावश्यक भीड़ को कम करने के लिए ब्लॉक स्तर पर ही समस्याओं का समाधान किया जाए। इसके साथ ही “जल-गंगा संवर्धन अभियान” के तहत चल रहे कार्यों की भी समीक्षा की गई और अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि सभी कार्य तय समय-सीमा के अंदर और उचित गुणवत्ता के साथ पूरे किए जाएँ।
अनुशासनहीन अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई
बैठक में जो अधिकारी अनुपस्थित पाए गए, उनके खिलाफ भी कड़ा रुख अपनाया गया। कलेक्टर ने ऐसे अधिकारियों को नोटिस जारी करने का आदेश दिया और चाकघाट, बैकुंठपुर तथा मनगवां नगर परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों की वेतन वृद्धि रोकने का आदेश भी दिया। इस बैठक में नगर निगम आयुक्त, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी, एसडीएम, तहसीलदार और अनेक विभागों के अधिकारी उपस्थित थे।
नई व्यवस्था से क्या होगा फायदा?
ई-टोकन प्रणाली लागू होने के बाद खाद वितरण की पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी हो जाएगी। इससे नकली किसानों और दलालों द्वारा किए जाने वाले फर्जीवाड़े पर प्रभावी रोक लगेगी। वास्तविक और पात्र किसानों को समय पर उर्वरक मिलेगा जिससे खेती में देरी नहीं होगी। कलेक्टर प्रतिभा पाल का स्पष्ट संदेश है कि जिले में सभी कार्य पारदर्शिता, समयबद्धता और सतर्कता के साथ होंगे, और किसी भी स्तर पर लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी एवं समाचार स्रोतों पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी केवल सामान्य सूचना के उद्देश्य से लिखी गई है। किसानों से अनुरोध है कि ई-टोकन प्रणाली और खाद वितरण की नवीनतम जानकारी के लिए अपने क्षेत्र की सहकारी समिति, कृषि विभाग या संबंधित सरकारी कार्यालय से सीधे संपर्क करें। लेखक या प्रकाशक किसी भी निर्णय के परिणाम के लिए उत्तरदायी नहीं होंगे।









